26 जुलाई 2026 - 18:39
लेबनान में कोई दख़ल नहीं देगा सीरिया, इस्राईल से टकराव नहीं चाहते जौलानी

इस्राईल की ओर से सीरिया पर हो रहे हमलों के सवाल पर अल-शरअ ने कहा कि उनकी सरकार फिलहाल इस्राईल के साथ किसी भी सैन्य टकराव से बचना चाहती है

दमिश्क: सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरअ (अल-जौलानी) ने लेबनान, इस्राईल और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई अहम बयान दिए हैं। अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि सीरिया का लेबनान में किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप का इरादा नहीं है। जौलानी ने कहा कि दमिश्क सरकार लेबनान को मौजूदा संकट से निकालने के लिए वहां की सरकार के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर समाधान तलाश रही है।

अहमद अल-शरअ ने कहा कि लेबनान की समस्या का समाधान केवल सुरक्षा उपायों से नहीं हो सकता। उनका मानना है कि यदि लेबनान में अस्थिरता और अराजकता बढ़ती है तो उसका सीधा असर सीरिया पर भी पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सीरिया लेबनान में हथियारों और युद्ध या शांति से जुड़े फैसलों का अधिकार केवल वहां की सरकार के पास रहने का समर्थन करता है।

इस्राईल की ओर से सीरिया पर हो रहे हमलों के सवाल पर अल-शरअ ने कहा कि उनकी सरकार फिलहाल इस्राईल के साथ किसी भी सैन्य टकराव से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सीरिया का हित इसी में है कि संघर्ष को और न बढ़ाया जाए।

जौलानी यह खुलासा करते हुए कहा कि कुछ देशों की मध्यस्थता में इस्राईल के साथ एक संभावित सुरक्षा समझौते पर बातचीत चल रही है। जौलानी के मुताबिक यदि यह समझौता सफल होता है तो व्यापक शांति का रास्ता खुल सकता है। हालांकि अलकायदा के पूर्व सरगना ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं होगा कि सीरिया गोलान हाइट्स पर अपने दावे से पीछे हट जाएगा।

सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति ने कहा कि केवल आर्थिक प्रतिबंध हटाने से सीरिया की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब तक सीरिया का नाम आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों की सूची से नहीं हटाया जाता, तब तक प्रतिबंधों में राहत का पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा।

जौलानी ने कुर्द बलों के साथ हुए समझौते के कार्यान्वयन पर भी बात की। उन्होंने माना कि इस समझौते पर अमल की प्रक्रिया धीमी है, लेकिन सरकार को अब भी इसके सफल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि लापता लोगों के मामलों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और अनुभवी देशों के सहयोग से एक विशेष समिति भी गठित की गई है।

इराक के साथ संबंधों को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार बेहतर हो रहे हैं। वहीं रूस के साथ संबंधों पर उन्होंने बताया कि सीरिया में रूसी सैन्य ठिकानों के भविष्य को लेकर बातचीत अभी जारी है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

जौलानी के इन बयानों को पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
टिप्पणीसंकेत
captcha